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एक उपप्रधानाचार्य के रूप में एक रावण से पाला पड़ा हुआ था जिसे सबके प्यार, आशीर्वाद, मेहनत और सत्य के मार्ग पर चलते हुए आज मार गिराया - बिजेन्दर सिंह एक अध्यापक

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आज फेसबुक पर निचे लिखी पोस्ट को पड़ा, तो दिल दुखी हुआ और हमें यह पोस्ट शेयर करने के लिए मजबूर होना पड़ा।  आज हमारे स्कूलों की ऐसे HOS के कारण क्या हालत हो गई है। आज ज्यादातर स्कूलों में यही हाल है। आज ज्यादातर स्कूलों में HOS अध्यापकों को अपना बंधुआ मजदूर से ज्यादा कुछ नहीं समझते, इसका कारण हमारे कुछ अध्यापकों की उनकी चापलूसी। आज हम अध्यापक अपने थोड़े से फायदे के लिए पुरे शिक्षक समाज के लिए अभिशाप बने हुए है ओर  HOS की चापलूसी करते है। 

सबसे बड़ी बात तो यह है की अध्यापकों की यूनिटी न होने के कारण, लगभग हर स्कुल में HOS अपनी मनमानी करे है और अध्यापक उनकी उचित और अनुचित बातें मानने के लिए मजबूर हो रहे है।  

DOE के समय -समय पर आने वाले सर्कुलर और आर्डर को अपने हिसाब से फॉलो करते है। 

आज हम सबको इसके खिलाफ लाबबंध होकर अपने सही हक के लिए लड़ना होगा और शिक्षकों के सम्मान को बचाना होगा अन्यथा हर स्कुल में यही होगा। 

हम HOS के खिलाफ नही है क्योंकि वे भी हम अध्यापकों में से ही है परन्तु प्रमोशन के बाद वे यह भूल जाते है की ' HOS भी कभी एक शिक्षक था'

HOS की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है की वे सब अध्यापकों से मिल कर स्कुल का माहौल स्वस्थ बनाये और हर अध्यापक का काम समय पर करने का प्रयास करें, अन्यथा परेशान करने का प्रयास न करे। 

ADMIN, DSTF


हर अध्यापक/HOS के लिए विचारणीय !






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